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शुक्रवार, 14 अक्तूबर 2011

अपने खून से सीचा जिन्हें


खुदा का इन्साफ
समझ नहीं पाता
किस्मत के निराले
खेल का कारण
ढूंढता रहता
अपने खून से सीचा
जिन्हें
क्यों माँ बाप से दूर
होते जाते ?
देखे थे हसीं सपने
जिनके लिए
क्यूं अब रुलाते ?
जिन्हें समझते थे
रहनुमा अपना
क्यों उनसे ही डरना
पड़ता
क्यूं माँ बाप को अनचाहा 
बोझ समझा जाता
सोते नहीं थे जिनकी
खैरियत के खातिर
उनके व्यवहार को
याद कर
अब रात भर रो रो कर
जागना पड़ता
14-10-2011
1651-59-10-11

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