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बुधवार, 12 अक्तूबर 2011

मेरी गली के नुक्कड़ का खंडहर नुमा अधबना मकान




मेरी गली के

नुक्कड़ का खंडहर नुमा
अध बना मकान
बहुतों को पनाह देता
जब भी उधर से गुजरता
नया नज़ारा दिखता
कभी कोई कचरे के ढेर से
थैलियाँ बीनता
कभी लोगों को ताश पत्ती
खेलते देखता
गली के कुत्ते वहाँ आराम
करते
मजदूर बैठ कर बीडी फूंकते
रात में भिखारी वहाँ सोते
निरंतर मन में सोचता
खंडहर नुमा अधबना मकान
महल नुमा घरों से अच्छा
जिनमें चंद लोग बसते
नाक मुंह जिनके सदा
चढ़े रहते
मुश्किल से लोगों से
हंस कर मिलते
खंडहर नुमा
अधबना मकान
बिना भेदभाव
जिनके सर पर छत नहीं
उन्हें सोने की जगह देता
ना दरवाज़े पर ताला
ना रोकने के लिए
चौकीदार
बेसहारों का सहारा
मेरी गली के
नुक्कड़ का खंडहर नुमा
अधबना मकान


© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
 
12-10-2011
1637-45-10-11

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