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शुक्रवार, 21 अक्तूबर 2011

तुम्हें चलते रहना है

तुम्हें
रास्ता खुद बनाना है

चट्टानों से फूट कर

नदी सा बहना है
इधर उधर
ना भटक जाना
मेहनत के पानी को
व्यर्थ ना छलकाना
गति पर अपनी काबू
रखना
भावनाओं में ना बहना
ना घबराना
ना हिम्मत कभी हारना
होंसला सदा कायम
रखना है
रुकावटों को पार करना
निरंतर चलते रहना 
ज़िन्दगी का लक्ष्य
बनाना है
जीवन के अंतिम
क्षण तक
हँसते रहना है
तुम्हें चलते रहना है
तुम्हें चलते रहना है

21-10-2011
1684-91-10-11

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