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शुक्रवार, 7 अक्तूबर 2011

अब मनानी है दीवाली तुम्हारी बाहों में




दिल में पल रहा
नफरत का रावण
तुम्हारी मीठी बातों ने
उग गया मोहब्बत का
सूरज
तुम्हारी अदाओं से
जाग गया
हसरतों का जहाँ
तुम्हारी मुस्काराहट से
अब मनानी है दीवाली
तुम्हारी बाहों में
जलाने हैं प्यार के दिए
साथ मिल कर
 करनी है
ज़िन्दगी रोशन
तुम्हारे
साथ गुजार कर
05-10-2011
1617-25-10-11

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