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शनिवार, 15 अक्तूबर 2011

उन्हें कौन किनारे कौन लगाएगा ?

जिनके
दिल ज़ख्मों से भरे
वो  हमदर्दी जताते हैं 
खुद की कश्ती
मंझधार में फंसी है 
हमें तैरना सिखाते हैं 
हमारे प्यार का
तमाशा बनाते हैं 
खुद दो कदम
साथ ना चल सके
हमें साथ चलने की
नसीहत देते हैं 
हम तो फिर भी सुन लेंगे
उनका कहा कर लेंगे
उन्हें कौन किनारे कौन
लगाएगा ?
जो ग़मगीन रहते हैं
दूसरों की सोचते रहते हैं
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
15-10-2011
1658-66-10-११
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
दर्द,मोहब्बत,गम,शायरी,

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