ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

शुक्रवार, 21 अक्तूबर 2011

बिछड़ने से पहले ही क्यूं बिछड़ गए ?


बिछड़ने से पहले ही
क्यूं बिछड़ गए ?
पास रह कर भी दूर
क्यूं हो गए ?
फासले दिलों के
क्यूं बढ़ गए ?
सोचने का तरीका
जुदा हो सकता है
ख्यालों में फर्क हो
सकता है
इसका मतलब ये तो नहीं
तुम हमको दुश्मन
समझने लगो
निरंतर रश्क करने लगो 
अपना हो कर भी पराया
समझने लगो
हमेशा दिल से चाहा
तुमको
क्यूं अब जान के प्यासे
हो गए ?
21-10-2011
1683-90-10-11

1 टिप्पणी: