ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

सोमवार, 10 अक्तूबर 2011

कोई उनसे पूछ ले


कोई उनसे पूछ ले
राज़-ऐ-दिल बता दे
क्यूं नज़र नहीं आते?
हमें इतना तडपाते?
ना जाने
कौन सा इम्तहान लेते
ज़ज्बातों से खेलते 
दिल में आग लगा कर
क्यूं  हवा देते ?
निरंतर इंतज़ार कराते
प्यासे की  प्यास
बढाते
ना खुद सुकून से रहते
ना हमें रहने देते
कोई उनसे पूछ ले
10-10-2011
1633-41-10-11

3 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल बुधवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

    उत्तर देंहटाएं
  2. behtarin rachna..doston ki jaan leti hai,..wakai muhabbat imtihaan leti hai..aap intzaar karte hain wo bhi to paas aate hain..paas na aate to kaise aag dil me lagakar hawa de jaate..sadar badhayee aaur amantran ke sath

    उत्तर देंहटाएं