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शुक्रवार, 14 अक्तूबर 2011

चेहरे पर चेहरे चढ़ा कर घूमते हैं चेहरे

चेहरे पर चेहरे 
चढ़ा कर घूमते हैं चेहरे

वक़्त,जरूरत के साथ

बदलते हैं चेहरे

हर चेहरे के अनेकानेक
चेहरे
एक खुद के लिए
एक परिवार के लिए
दोस्त,रिश्तेदारों के लिए
फर्क होते हैं चेहरे
निरंतर
मिजाज़ बदलते हैं चेहरे
अनजान के लिए
सबसे बेहतर दिखते हैं
चेहरे
सच ईमान की मूर्ती
नज़र आते हैं चेहरे
चिकनी चुपड़ी बातों से
भरे होते हैं चेहरे
कौन सा असली ?
कौन सा नकली ?
पहचान में
आते नहीं चेहरे

किसी को नहीं बख्शते

चेहरे पर चेहरे
निरंतर
लुभाते भरमाते हैं
चेहरे
14-10-2011
1649-57-10-11

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