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शुक्रवार, 21 अक्तूबर 2011

दिल का दरवाज़ा, ज़हन के दरीचे खोल दो

दिल का दरवाज़ा
ज़हन के दरीचे खोल दो
हमें जाने बिना ही
हमसे नफरत ना करो
इतना तो याद रखो
चाँद अँधेरे में उगता है
कमल कीचड में खिलता है
सूरत पर ना जाया करो
सीरत भी देखा करो
हर चाहने वाले को
आशिक ना समझा करो
दिल से चाहने वालों की
कद्र किया करो
उन्हें भी गले से लगाया करो
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
दरीचे =खिड़कियाँ
21-10-2011
1681-88-10-11

1 टिप्पणी:

  1. Hanne to dil ka darwaja khol he rakha hai aap aaiyey to sahi. Sirji splendid composition and use of simple words to comvey such deep and incisive thought.

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