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मंगलवार, 18 अक्तूबर 2011

बाल कविता-छुइ मुई


बाल कविता-छुइ मुई 
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नज़र भर
देख ले अगर कोई 
तो शरमा जाती 
हाथ लगाए तो
घबरा कर
अपने आप में
सिमट जाती 
बारीक पत्तियाँ 
छोटी सी बात से
डर जाती
छोटी मरमरी काया 
निरंतर
बच्चों को लुभाती
लाज,शर्म
कोई सीखे उससे
छुई मुई कहलाती
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
18-10-2011
1671-79-10-11

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