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शनिवार, 15 अक्तूबर 2011

जुबाँ तो कह ना सकी फिर भी तुम समझ गए


जुबाँ तो 
कह ना सकी 

फिर भी 
तुम समझ गए

हाल-ऐ दिल जान गए

मोहब्बत को मुकाम पर
पहुंचा गए
बिन कहे भी
एक दूजे की चाहत
बयाँ कर गए
निरंतर तड़पते रहे
जिस के खातिर
उन हसरतों को पूरा
कर गए

15-10-2011
1653-61-10-11

1 टिप्पणी:

  1. बहुत बढ़िया लिखा है आपने! और शानदार प्रस्तुती!
    मैं आपके ब्लॉग पे देरी से आने की वजह से माफ़ी चाहूँगा मैं वैष्णोदेवी और सालासर हनुमान के दर्शन को गया हुआ था और आप से मैं आशा करता हु की आप मेरे ब्लॉग पे आके मुझे आपने विचारो से अवगत करवाएंगे और मेरे ब्लॉग के मेम्बर बनकर मुझे अनुग्रहित करे
    आपको एवं आपके परिवार को क्रवाचोथ की हार्दिक शुभकामनायें!
    http://kuchtumkahokuchmekahu.blogspot.com/

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