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मंगलवार, 18 अक्तूबर 2011

एक बार मिल तो लो



क्यों बहम
मन में रखते हो
क्यों इतना डरते हो
एक बार मिल तो लो
चंद बातें कर तो लो
भ्रम मन के मिट
जायेंगे
दिल के डर निकल
जायेंगे
चमकते सूरज से
नज़र आयेंगे
दिल-ओ-दिमाग पर
छा जाएँगे
तुम्हारी ज़िन्दगी में 
रौशनी फैलायेंगे
तुम्हारे जहाँ को निरंतर
महाकाएंगे
एक बार मिल तो लो
मिल तो लो .........
18-10-2011
1672-80-10-11

6 टिप्‍पणियां:

  1. इस प्रविष्टी की चर्चा कल बुधवार के चर्चा मंच पर भी की जा रही है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  2. मिलने से ,भावों के आदान प्रदान से भ्रम दूर होते हैं!

    उत्तर देंहटाएं