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मंगलवार, 4 अक्तूबर 2011

वक़्त बुरा हो ,किस्मत साथ ना हो

वक़्त बुरा हो
किस्मत साथ ना हो
हर पासा उलटा पड़ता
हिम्मत जवाब देने
लगती
होंसला टूटता है
ज़ज्बा कम हो जाता
खुद से यकीन उठने
लगता
खुदा याद आता
चाहिए ऐसे समय
एक दोस्त ऐसा
जो हिम्मत बढाता रहे
निरंतर दिलासा
देता रहे
आखों से आंसू बहने
ना दे
पथ से डिगने ना दे
डा.राजेंद्र तेला, निरंतर,
04-10-2011
1604-12-10-11

2 टिप्‍पणियां:

  1. वाह....बढ़िया लिखा है भाई......वास्तव में आप बहुत सदिच्छा-पूर्ण लिखते हो.....

    उत्तर देंहटाएं
  2. वक़्त बुरा हो
    किस्मत साथ ना हो
    हर पासा उलटा पड़ता
    हिम्मत जवाब देने
    लगती.. behtreen...

    उत्तर देंहटाएं