ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

रविवार, 9 अक्तूबर 2011

दिल की प्यास निरंतर अधूरी की अधूरी रही

 बादल गरजे
बिजली चमकी
बरसात नहीं आयी
वो नज़र आयी
मुस्करायी
मन में हसरतें
जगायी
फिर ना जाने
कहाँ छुप गयी
मन का चैन
खो गया
रातों की
नींद उड़ गयी
दिल की प्यास
निरंतर अधूरी की
अधूरी रही
 07-10-2011
 1622-30-10-11

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें