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बुधवार, 28 सितंबर 2011

बेटी

बेटी

ह्रदय का अंग होती

उसकी पीड़ा सही

ना जाती

व्यथा उसकी

निरंतर रुलाती

ह्रदय को तडपाती

एक पल भी चैन नहीं

लेने देती

मन सदा

उसकी कुशल क्षेम चाहता

उसके प्यार में  डूबा

रहता

बेटी का जन्म

पिता का सबसे

महत्वपूर्ण सृजन होता

प्रेम निश्छल,निस्वार्थ होता

उसकी खुशी ह्रदय की

सबसे बड़ी खुशी होती

बेटी ,पिता के जीवन में

खिलती धूप सी होती

उसकी कमी

अन्धकार से कम

ना होती

बेटी  पिता को

परमात्मा की भेंट होती

उसके नाम से ही आँखें

नम होती 

28-09-2011
 1577-148-,09-11

1 टिप्पणी:

  1. 2011/10/1 Shashi purwar

    बहुत ही सुंदर मोती से उकेरे हुए शब्द ,

    उत्तर देंहटाएं