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सोमवार, 5 सितंबर 2011

क्यों ख्यालो में खोये रहते

क्यों ख्यालो में 
खोये रहते
जान कर अनजान
बने रहते
दूरियां कम नहीं करते
भटकतों को 
सहारा नहीं देते
खुद परेशान रहते
हमें भी परेशान
करते हो
क्यों हिम्मत नहीं 
कर पाते ?
निरंतर 
घुट घुट कर जीते हो
डा.राजेन्द्र तेला,निरंतर  
05-09-2011
1446-20-09-11

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