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बुधवार, 21 सितंबर 2011

आँख खुलते ही

आँख खुलते ही
चेहरा उनका दिखा
सुबह को
खुशगवार बना दिया
रोते हुए को हँसा दिया
चेहरा दिखा कर फिर 
छिपा लिया
ना मालूम किस
बात से खफा हो गए  
उनके अंदाज़ ने
निरंतर इंतज़ार को
ज़िन्दगी का हिस्सा
बना दिया
गर्मी-ए-हसरत ने
 चाहने वालों के
दिलों को जला 
दिया
21-09-2011
1534-105-09-11

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति आज के तेताला का आकर्षण बनी है
    तेताला पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
    अवगत कराइयेगा ।

    http://tetalaa.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  2. राजेन्द्र जी नमस्कार्। सुन्दर भाव है कविता में, सबसे अच्छा ये लगा कि डाक्टर हो कर कविता लेखनकरते हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  3. अति सुन्दर, शब्दों और भावो का अत्यंत सुन्दर तालमेल

    उत्तर देंहटाएं