ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

गुरुवार, 29 सितंबर 2011

समय नहीं मिला

बहुत आसानी से
कह दिया
समय नहीं मिला
बहुत कठिन होता
कहना
करने की इच्छा नहीं
ह्रदय को भाया नहीं
मन निश्चित ना
कर सका
निरंतर वो सब
करता रहा
जो मन को भाता रहा
अनावश्यक कार्यों में
लिप्त होता रहा
समय व्यर्थ करता रहा
सदा झूठ बोलता रहा
स्वयं को
खुश करता रहा
झूठ से बच सकता था
फिर भी 
सदा  कहता रहा
समय नहीं मिला
29-09-2011
1582-153-,09-11

1 टिप्पणी:

  1. वाह समय मिला नहीं .........,और
    दिल को बहलाना भी आया नहीं :)

    उत्तर देंहटाएं