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शुक्रवार, 2 सितंबर 2011

हास्य कविता--हूर के साथ लंगूर मत बाँधना

हँसमुखजी बेटे को
कहानी सुना रहे थे
एक सीधी सादी सुन्दर
महिला थी
उसकी शादी एक
जाहिल और गंवार
आदमी से हो गयी
जो ना देखने में सुन्दर था
ना ही कोई काम करता था
निरंतर हुक्म चलाता था
बच्चा रोने लगा
हँसमुखजी ने रोने का
कारण पूछा
बच्चे ने जवाब दिया
मुझे बच्चा समझ कर
बेवकूफ बना रहे हो
कहानी की जगह
हकीकत बता रहे हो
मम्मी आप के बारे में
ऐसा ही कहती है
उनकी किस्मत फूट गयी
ये भी बोलती है
रोज़ भगवान् से प्रार्थना
करती है
ऐसा पती किसी
दुश्मन को भी नहीं देना
चाहे कुंवारा रख देना 
हूर के साथ लंगूर
मत बाँधना
02-09-2011
1435-10-09-11

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