ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

रविवार, 11 सितंबर 2011

जीने के लिए ज़िन्दगी में दर्द भी चाहिए

जीने के लिए
ज़िन्दगी में दर्द भी 
चाहिए
तकलीफें कितनी भी आएँ  
हर हाल में  जीना चाहिए
लाख उम्मीदें टूटें
उम्मीद फिर भी रखनी 
चाहिए
ग़मों को सहना भी 
सीखना चाहिए
अश्क कई बार बहेंगे
हर बार अश्क पोंछ कर
आगे बढना चाहिए
जीत के लिए कभी कभी 
हार भी होनी चाहिए
जो भी प्यार से गले मिले
उसे गले लगाना चाहिए
दुश्मनों से 
घबराना नहीं चाहिए 
हिम्मत होंसले से 
चलते रहना चाहिए 
जीने के लिए
ज़िन्दगी में दर्द  भी
चाहिए
11-09-2011
1486-58-09-11
selected
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

3 टिप्‍पणियां:

  1. आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा दिनांक 12-09-2011 को सोमवासरीय चर्चा मंच पर भी होगी। सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  2. आशावादी दृष्टिकोण लिये सुंदर अभिव्यक्ति.जीवन में यह संतुलन ही जीवन को सफल करता है.

    उत्तर देंहटाएं