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गुरुवार, 1 सितंबर 2011

हँसमुख जी को मंच पर गाने का मौक़ा मिल गया -हास्य कविता

 
हँसमुख जी को
मंच पर गाने का मौक़ा
मिल गया
भड़ास निकालने का
शानदार
साधन हाथ लग गया
जोर जोर से कर्ण फोडू ,
बेसुरी सर दर्द कारक
आवाज़ में गाने लगे
एक एक कर श्रोता
उठते गए
हॉल से बाहर जाते गए
हॉल खाली हो गया
हँसमुखजी का गायन
निरंतर चलता रहा
अंत में गायन समाप्त हुआ
एक मात्र श्रोता ने
तालियों से  स्वागत किया
हँसमुखजी ने लपक कर
उसका अभिवादन किया
अच्छे गायन की
कद्र करने के लिए
पीठ थप थपा कर
धन्यवाद दिया
उसने इशारे से बताया
गूंगा बहरा माइक वाला है
माइक वापस ले जाने के
लिए मजबूरी में खडा है
01-09-2011
1431-06-09-11

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