ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

शनिवार, 17 सितंबर 2011

किसे व्यथा ह्रदय की सुनाऊ ? कैसे पीड़ा मन की बताऊँ ?

किसे ह्रदय की
 व्यथा सुनाऊ ?
कैसे मन की
पीड़ा बताऊँ ?
कौन  मानेगा ?
कौन विश्वाश करेगा
?
जब अपने ही

पराया समझने लगे

कसूरवार बताने लगे 
किसी और से 

आशा  क्या करूँ ?
अब दोस्त दुश्मन

एक हो गए

पल पल वार कर रहे

कैसे अपने को 
बचाऊँ ?
किसे ह्रदय की
 व्यथा सुनाऊ ?
कैसे मन की
पीड़ा बताऊँ ?
डा.राजेंद्र तेला, निरंतर, 
17-09-2011
1517-88-09-11

1 टिप्पणी: