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शुक्रवार, 2 सितंबर 2011

जिसने जीत लिया स्वार्थ को

ग्रंथों को पढ़ लो
इतिहास को देख लो
ज्ञानी में ढूंढ लो
अज्ञानी में देख लो
छोटे बड़े में खोज लो
स्वार्थ मनुष्य के
स्वभाव का
अभिन्न अंग है 
जिसने जीत लिया
स्वार्थ को वो ईश्वर का
सामीप्य पाता
जिसे जीत लिया स्वार्थ ने
वो ईश्वर से दूर रह जाता
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
02-09-2011
1434-09-09-11

1 टिप्पणी:

  1. bikul satya ........... jeeva ko sundar hi hona chahiye . seart me manushya kurup ho jata hai . .......! aur maan v aatma ki sundarta samapt ho jati hai .

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