ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

गुरुवार, 8 सितंबर 2011

पलाश

केसरिया पुष्पों से लदा
पलाश का वृक्ष
वन में अग्नि का 
आभास देता 
नयनाभिराम हरीतिमा के मध्य
न उसके पुष्पों को
कोई माली तोड़ता
न माला में पिरोता
न 
कोई उन्हें मंदिर में चढ़ाता
अपने में मग्न मदमस्त पलाश
लेशमात्र भी दुखी नहीं होता
हर्षोल्लास से जीता रहता
पुष्पों का केसरिया रंग
जिस पर भी चढ़ जाता
आसानी से नहीं उतरता
अमिट छाप छोड़ देता
निरंतर
संसार को सन्देश देता
जहां भी रहो
अपनी पहचान बनाओ
कर्मों से जाने जाओ
कौन क्या करता है
कौन क्या कहता है
चिंता मुक्त हो कर
लक्ष्य की ओर बढ़ते जाओ
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
10-09-2011
1478-50--09-11
जीवन ,जीवन मन्त्र ,पलाश,प्रकृति,वन,चिंता,कर्म
-
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
08-09-2011
1465-37-09-11

1 टिप्पणी: