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मंगलवार, 27 सितंबर 2011

लोग बुलाने से नहीं आते


इल्तज़ा 
कितनी भी करो 
लोग बुलाने से 
नहीं  आते
दिल में 
मोहब्बत हो अगर 
अपने आप खिचे 
चले आते हैं 
कितनी भी दूर रहते हो 
दिल में समा जाते हैं 
इरादा अगर पाक हो
जिनसे पहले मिले नहीं
वो भी दिल को लुभाते हैं 
यूँ तो मोहब्बत में 
साए भी अपने लगते हैं 
इंतज़ार वो भी कराते हैं 
सब्र रखो अगर 
एक दिन वो भी 
अपने बन जाते हैं 
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 

मोहब्बत,शायरी,
27-09-2011
1566-136709-11

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