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शुक्रवार, 16 सितंबर 2011

सपने ,सपने ही रह जाते

हर रात सपने आते  हैं 
नए पुराने चेहरे दिखते हैं 
कुछ हँसाते कुछ रुलाते हैं 
कुछ धुंधले हो जाते हैं 
कुछ सुबह तक याद रहते हैं 
मन को तडपाते हैं 
दिल को रुलाते हैं 
निरंतर जहन में रहते हैं 
फिर दिख जाएँ
उम्मीद में रात का
इंतज़ार करते हैं 
दिल दुखाने को 
सपने
सपने ही रह जाते हैं 
डा.राजेंद्र तेला, निरंतर,
16-09-2011
1515-86-09-11

3 टिप्‍पणियां:

  1. लेकिन फ़िर भी सपने तो कम से कम अपने होते हैं। जो इंसान सपने नही देखता वो मृतप्राय कहलाता है। कभी तो स्वप्न पूरे होते ही हैं जनाब।

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  2. sapne to apne hote hai ........aur pure bhi hote hai ...ek sapne hi to hai jo dukh nahi pahuchate ...jab aate hai to muskurahat de jate hai

    उत्तर देंहटाएं