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रविवार, 11 सितंबर 2011

अनुत्तरित प्रश्न

हवा कभी मंद
कभी त्वरित
गति से चलती
कभी ठहर जाती
वर्षा कभी सपना
बनती
कभी रुकती नहीं
धूल कभी गुबार
बनती
कभी चुपके से
ज़म जाती
जो सब कराता
जिसके
हाथ में है डोर
वो कभी दिखता
नहीं
एक रहस्य जो
कभी उजागर
होता नहीं
फिर भी सब
उस शक्ती को
आशा और विश्वास से
नमन करते रहते
निरंतर उसे ढूंढते
रहते
वो कभी किसी को
दिखता नहीं
किसी से मिलता नहीं
फिर भी सब
उसकी डोर से
बंधे रहते
वो है भी या नहीं
निरंतर प्रश्न करते
रहते
जीवन भर
अनुत्तरित रहते
एक दिन
संसार से विदा
ले लेते
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
11-09-2011
1484-56-09-11
selected 

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