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सोमवार, 12 सितंबर 2011

उनका मुस्काराना हुआ इक नज़्म का जन्म हुआ

उनका
मुस्काराना हुआ
इक नज़्म का
जन्म हुआ
ख्याल
उड़ान भरने लगे
लफ्ज़ अपने आप
जहन में आने लगे
अरमान 
कुलांचें भरने लगे
कलम बिना रुके
निरंतर चलती रही
उनकी ख़ूबसूरती
ख्यालों में उतर आयी 
उनकी तारीफ़ में लिखी
नज़्म वजूद में आयी
दिल की ख्वाइश
अब आम हो गयी
12-09-2011
1493-65-09-11
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