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सोमवार, 26 सितंबर 2011

वक़्त बदल गया

इंसान,इंसान का
दुश्मन हो गया
ऐतबार दिलाना
मुश्किल हो गया
दिलों में बहम
शुमार हो गया
मनों में शक 
घर कर गया
ईमान पर सवाल
खडा हो गया
जीना अब दुश्वार
हो गया
निरंतर विश्वास
से जीना
सपना हो गया
26-09-2011
1561-132-09-11

2 टिप्‍पणियां:

  1. ज़िंदगी कटु सत्य है,सपना नहीं है
    खेल इसकी आग में तपना नहीं है,
    कौन देगा साथ इस भूखी धरा पर
    जबकि अपना खास भी अपना नहीं है।

    उत्तर देंहटाएं
  2. निरंतर विश्वास में जीना ही आसान होता है ,
    सपना कभी भी नहीं कुर्बान होता है ,
    वक़्त तो हमेशा बदल जाते है ,
    इन्सान भी इन्सान के दुश्मन बन जाते है
    पर दोस्त आसानी से कहाँ मिल पाते है

    उत्तर देंहटाएं