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शुक्रवार, 9 सितंबर 2011

हँसमुखजी भूखे प्यासे थे(हास्य कविता)

हँसमुखजी भूखे प्यासे थे(हास्य कविता)
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हँसमुखजी भूखे प्यासे थे
ढाबे पर पहुँच गए
बैरे से बोले
पहले पानी पिला दे
फिर खाने की थाली लगा दे
बैरा बोला बावर्ची छुट्टी पर है
इसलिए खाना बना नहीं
पानी आज आया नहीं
कुढ़ते हुए हँसमुखजी ने कहा
खाने को बिस्कुट
पीने को चाय ही ला दे
बैरे ने जवाब दिया
दूध भी आज आया नहीं
बिस्कुट अलमारी में बंद है
चाबी मालिक के पास है
हँसमुखजी
भन्नाते हुए बोले
ढाबे को ताला क्यों नहीं लगा देते
बैरा बोला कुंडा टूट गया है
ताला भी लग नहीं सकता
बाल नोचते हुए हँसमुखजी दहाड़े
मालिक को भेज दे
जवाब आया मालिक कुंडा
 ठीक करवाने के लिए
बढई को लेने गए हैं
हँसमुखजी क्रोध में
डिस्को डांस करने लगे
जोर से चिल्लाए
तुम साथ क्यों नहीं चले गए
बैरा बोला
मैंने तो मालिक को कहा था
पर मालिक बोले
वैसे तो बाहर बोर्ड लगा दिया है
ढाबा पांच दिन तक निरंतर बंद रहेगा
खाने पीने को कुछ नहीं मिलेगा
फिर भी कोई बेवकूफ आ जाए तो
जवाब देने के लिए
मुझे ढाबे पर ही छोड़ गए

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
09-09-2011
1475-47--09-11

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