ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

शुक्रवार, 30 सितंबर 2011

कोई पराया अपना हुआ

आज
नया रिश्ता बना
कोई पराया अपना
हुआ
दिल की बातों को
उसने
बड़े सब्र से सुना
मेरे दर्द को समझा
बातों से दिलासा
रोने को कंधा दिया
मन हल्का हुआ
निरंतर बुझे चेहरे पर
सुकून का आगाज़ हुआ
हालात से लड़ने का
नया होंसला मिला
मन में छिपे दुखों को
विराम मिला
रिश्तों पर यकीन
कायम हुआ
इंसानियत ज़िंदा है
आज अहसास हुआ
आज
नया रिश्ता बना
कोई पराया अपना
हुआ
30-09-2011
1586-157-,09-11

3 टिप्‍पणियां:

  1. 'कोई अपना' इस शब्द में इतनी गहराई,इतना प्रेम,इतनी शक्ति और इतनी आत्मीयता होती है कि बस जीवन में इससे अधिक की अपेक्षा ही नहीं रह जाती...

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत ही प्यारा , कोई पराया हुआ अपना ,
    रिश्ता नया बना है जो था सपना ,
    जब दिल मिले , तो करना पड़ेगा
    रिश्तो पे यकीं ,इंसानियत आज भी
    जिन्दा है यहीं ...............!
    ब्लॉग भी सुन्दर और प्यारा हो गया , :)

    उत्तर देंहटाएं