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रविवार, 11 सितंबर 2011

ऐ दोस्त ........... इससे ज्यादा निरंतर कुछ कह ना सकेगा

ऐ दोस्त मुझे
तेरे दोस्ती पर हमेशा
नाज़ रहेगा
तेरे साथ गुजारा वक़्त
कभी ना भूलेगा
तुझे याद रहे ना रहे 
मुझे निरंतर याद रहेगा
तुझ पर यकीन हमेशा 
बरकरार रहेगा
तेरा कहा एक एक लफ्ज़ 
जहन में रहेगा 
तेरी मोहब्बत का अहसास 
दिल में बसा रहेगा
तेरी रुसवाई से अश्कों का
बहना नहीं रुकेगा
अब मुस्कराना मुमकिन
ना होगा
तेरे बगैर जीना
मौत को गले लगाना होगा
मेरे हमनशीं तेरी दोस्ती पर
हमेशा गुमाँ रहेगा
मरने के बाद भी
दिल तुझे याद करता रहेगा
ऐ दोस्त ...........
इससे ज्यादा निरंतर 
कुछ कह नहीं सकेगा
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
11-09-2011
1487-59-09-11

4 टिप्‍पणियां:

  1. इससे ज्यादा निरंतर
    कुछ कह ना सकेगा... bhaut khub...

    उत्तर देंहटाएं
  2. sacha kaha aap ne
    mare bhi kuch dost hai jinahe may kabhi nahi bhula sakathi hu
    unahe hamesa yadh karathi rahathi hu
    dosti......

    उत्तर देंहटाएं
  3. दोस्त होते ही ऐसे हैं बहुत सुंदर रचना ....

    समय मिले आपको कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर
    आपका स्वागत है
    http://mhare-anubhav.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं