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सोमवार, 26 सितंबर 2011

ना जाने क्यों ?

ना जाने क्यों ?
ना मेल
ना मुलाक़ात
ना जान पहचान
ना कोई बात
फिर भी
ना जाने क्यों ?
कुछ लोग
मन को भाते
दिल को लुभाते
निरंतर मिलने की
चाहत जगाते
ख्याल से ही
दिल को सुकून
पहुंचाते
जहन में हलचल
मचाते
ना जाने क्यों ?
कुछ लोग ......
 डा.राजेंद्र तेला, निरंतर
26-09-2011
1557-128-09-11

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