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रविवार, 25 सितंबर 2011

हँसमुखजी नाटक में दोस्त का रोल कर रहे थे (हास्य कविता)

हँसमुखजी नाटक में
दोस्त का रोल कर रहे थे
अपनी जान देकर
हँसमुखजी को डाकूओं
से बचाने वाले
अपने पहलवान मित्र की
लाश के पास खड़े हो कर
उसकी शान में कसीदे
पढ़ रहे थे
हँसते हँसते कहने लगे
तुम्हारे जैसे दोस्त नहीं
हो सकते
भगवान् करे अगले
जन्म में भी मेरे दोस्त
बन कर मेरे लिए
अपनी जान दे दो
उसके अगले जन्म भी
ऐसा ही करो
उससे अगले वाले
      जन्म  में भी ऐसा.......
इतने में पहलवान दोस्त
मरने का नाटक छोड़
फुंफकारते हुए उठा
हँसमुखजी पर पिल पडा
दहाड़ते हुए बोला
अगर हर बार
तेरे खातिर मरने के
लिए ही पैदा होना है
हर बार तुझे
मेरी लाश के पास
खड़े हो कर हंसना है
तो ऐसा दोस्त नहीं
चाहिए
मैं मरूं उससे पहले
क्यों ना तुझे यमलोक
भेज दूं
अगले जन्म में तुझे
पैदा ही ना होने दूं 
25-09-2011
1552-123-09-11

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