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शनिवार, 24 सितंबर 2011

हँसमुखजी को क्रिकेट खेलने का शौक चढ़ा (हास्य कविता)

हँसमुखजी को
क्रिकेट खेलने का
शौक चढ़ा
फ़ौरन मैदान पर
पहुँच गए
लगे बैटिंग करने
पहली गेंद कमर पर लगी
मुंह से चीख निकली
दूसरी गेंद कंधे पर लगी
मुंह से
हाय अम्मा निकला
तीसरी गेंद हाथ पर लगी
मुंह से जोर की आह निकली
चौथी गेंद मुंह पर लगी
मुंह से तेरे ऐसी की तैसी
निकला
जोश में नथुने फुलाते हुए
मदहोश सांड की चाल में
बौलर के पास पहुँच गए
हाँफते हुए धीमी आवाज़ में बोले
अबे आऊट नहीं कर सका तो
मुंह बंद करवाना चाहता है
तूं बौल मार कर निरंतर
खुद को हीरो समझ रहा था
ले बैट की मार खा
हीरो से विलेन बनाता हूँ
सारी हीरो गिरी निकालता हूँ
बल्ले से वार करते
उससे पहले ही खुद दर्द से
बिलबिलाते हुए
चक्कर खाकर गिर गए
विलेन बनाते बनाते
कॉमेडियन का रोल
कर गए
24-09-2011
1551-122-09-11

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

    उत्तर देंहटाएं