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रविवार, 18 सितंबर 2011

आज की रात इंतज़ार में गुजर गयी

आज की रात
इंतज़ार में गुजर गयी
कल रात की
शुरुआत सवाल से होगी
जवाब की उम्मीद होगी
निरंतर
बहानेबाजी होगी
शिकवा शिकायत होगी 
फिर रजामंदी होगी
रात गहरी हो जायेगी
नींद आने लगेगी
आँखें बंद होगी 
सवाल,जवाब से
बात आगे नहीं बढ़ेगी
कहानी वहीँ अटक
जायेगी
रात यूँ ही गुजर
जायेगी   
19-09-2011
1526-97-09-11

2 टिप्‍पणियां:

  1. पहले तो में आप से माफ़ी चाहता हु की में आप के ब्लॉग पे बहुत देरी से पंहुचा हु क्यूँ की कोई महताव्पूर्ण कार्य की वजह से आने में देरी हो गई
    आप मेरे ब्लॉग पे आये जिसका मुझे हर वक़त इंतजार भी रहता है उस के लिए आपका में बहुत बहुत आभारी हु क्यूँ की आप भाई बंधुओ के वजह से मुझे भी असा लगता है की में भी कुछ लिख सकता हु
    बात रही आपके पोस्ट की जिनके बारे में कहना ही मेरे बस की बात नहीं है क्यूँ की आप तो लेखन में मेरे से बहुत आगे है जिनका में शब्दों में बयां करना मेरे बस की बात नहीं है
    बस आप से में असा करता हु की आप असे ही मेरे उत्साह करते रहेंगे

    उत्तर देंहटाएं