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शुक्रवार, 2 सितंबर 2011

बहुत देर हो चुकी होगी जब मौसम बदलेगा

बहुत देर
हो चुकी होगी
जब मौसम बदलेगा
गुलशन
फिर से महकेगा
ज़ख्म भरने लगेंगे
चेहरे हंसने लगेंगे
गिले शिकवे दूर होंगे
अपने पराये एक होंगे
नफरत के बादल
छट चुके होंगे
तब तक
भाई भाई की जान
ले चुके होंगे
सब खुदा को प्यारे
हो चुके होंगे
ऊपर से देख कर
पछता रहे होंगे
जब तक दिलों की
आग ठंडी होगी
बहुत देर
हो चुकी होगी
जब मौसम बदलेगा
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
02-09-2011
1432-07-09-11

2 टिप्‍पणियां:

  1. bahut achchi vyangyaatmak haasya kavita hai.ganeshchaturthhi ki haardik badhaaiyan.

    उत्तर देंहटाएं
  2. bahut khobsoorat .
    mausam badlne ke intjaar mai to hum hi badalte ja rahe hai .


    AAPKO GANESH CHATHURTHI HI HARDIK SHUBKAMNAYE

    उत्तर देंहटाएं