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गुरुवार, 18 अगस्त 2011

उनकी लिखी हर कविता में, उनका पैगाम ढूंढता हूँ

दिल में पास
मगर नज़रों से 
दूर रहते हैं
सोचता हूँ
कैसे देखूं उनको ?
रास्ता सूझता नहीं
मन ही मन 

मिल लेता हूँ
ख़्वाबों में देख लेता हूँ
दो शब्द लिख देता हूँ
उन तक 

ख्याल पहुंचाता हूँ
कभी वो भी कुछ
लिख देंगे
ख्वाहिश

समझ जाएँगे
मिलने का

तरीका बताएँगे
इस उम्मीद से ही
खुश हो जाता हूँ
उनकी लिखी
हर कविता में
उनका पैगाम
ढूंढता हूँ
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
18-08-2011
1378-100-08-11

2 टिप्‍पणियां:

  1. जो दिल का करीब होते है उनका पैगाम कभी न कही मिल ही जाता है...

    बढ़िया रचना...

    उत्तर देंहटाएं