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रविवार, 28 अगस्त 2011

वो आज भी आयेगा या नहीं ?

वही शाम वही डूबते
सूरज की रोशनी
पेड़ों के
लम्बे सायों के नीचे
घरोंदों में
लौटती चिड़ियाओं की
चहचाहट की गूँज में
वो किसी के इंतज़ार में
बेचैनी से
ऊँगलियाँ चटखा रही
झील सी गहरी आँखें
परेशानी साफ़ साफ़
बता रही
मानो बहती हवा से
पूँछ रही
वो आज भी आयेगा
या नहीं ?  
28-08-2011
1412-134-08-11

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