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मंगलवार, 16 अगस्त 2011

सत्ता का नशा बहुत भयावह होता

सत्ता का नशा
बहुत भयावह होता
इसके नशे में इंसान
जानवर से कम नहीं होता
जो ना माने
उसकी जान ले लेता
किस को कब खा जाए
पता नहीं चलता
जनता को
कुचलने के लिए
निरंतर नए तरीके
इस्तेमाल करता
घमंड में चूर रहता
धर्म ईमान सब भूलता
मकसद सिर्फ
किसी तरह सत्ता में
रहना होता
भूल जाता
कभी जनता से भी
पाला पडेगा
क्या हाल जनता करेगी ?
सिर्फ खुदा जानता

16-08-2011

1368-90-08-11

1 टिप्पणी:

  1. Nice post .

    अन्ना तो पूरा अन्ना है और देसी है , कांग्रेसी है
    अगर कोई गन्ना भी खड़ा हो किसी बुराई के खि़लाफ़ तो हम हैं उसके साथ।

    कांग्रेसी नेता कह रहे हैं कि अन्ना ख़ुद भ्रष्ट हैं।
    हम कहते हैं कि यह मत देखो कौन कह रहा है ?
    बल्कि यह देखो कि बात सही कह रहा है या ग़लत ?
    क्या उसकी मांग ग़लत है ?
    अगर सही है तो उसे मानने में देर क्यों ?
    अन्ना चाहते हैं कि चपरासी से लेकर सबसे आला ओहदा तक सब लोकपाल के दायरे में आ जाएं और यही कन्सेप्ट इस्लाम का है।
    कुछ पदों को बाहर रखना इस्लाम की नीति से हटकर है।
    अन्ना की मांग इंसान की प्रकृति से मैच करती है क्योंकि यह मन से निकल रही है, केवल अन्ना के मन से ही नहीं बल्कि जन गण के मन से।
    इस्लाम इसी तरह हर तरफ़ से घेरता हुआ आ रहा है लेकिन लोग जानते नहीं हैं।
    आत्मा में जो धर्म सनातन काल से स्थित है उसी का नाम अरबी में इस्लाम अर्थात ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण है और भ्रष्टाचार का समूल विनाश इसी से होगा।
    आप सोमवार को
    ब्लॉगर्स मीट वीकली में भी हमने यही कहा था।

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