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गुरुवार, 18 अगस्त 2011

लडकी को छेड़ते हो (हास्य कविता )

हँसमुखजी बाज़ार से
गुजर रहे थे
एक दूकान पर लगी
कन्या की फोटो पर
मोहित हो गए
पास जाकर घूरने लगे
बहुत खूबसूरत हो
बुदबुदाने लगे
पास खड़े पुलिसवाले ने
सुन लिया
अकेली लडकी को छेड़ते हो
कह कर धर लिया
फ़ौरन थाने में बंद
कर दिया
अगले दिन उन्हें जज के
सामने पेश किया गया
हँसमुखजी से
अपराध के बारे में
पूछा गया
हँसमुखजी बोले
हुज़ूर झूंठा
आरोप लगा रहे हैं
मैं तो लडकी की फोटो से
बात कर रहा था
जज साब कुपित हो गए
क्रोध में बोले
फोटो में लडकी को
छेड़ते हो
असलियत में इससे
ज्यादा करते होगे
तुम्हें माफ़ नहीं करा
जा सकता
सज़ा में तुम्हें
जेल जाना पडेगा
निरंतर लड़कियों को
छेड़ने की आदत को
छुडाना होगा

18-08-2011

1379-101-08-11

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