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सोमवार, 8 अगस्त 2011

सुकून की तलाश में भटक रहा था

सुकून की तलाश में

भटक रहा था

चलते चलते थक

गया था

हार कर बैठ गया

सपनों की दुनिया में

खो गया

अचानक ठंडी हवा का

झोंका आया

माहौल को महकाया

मुझे नींद से जगाया

नज़र उठायी

वो सामने खडा था

मुस्करा कर आगे

चल दिया

मुझे तरोताजा

कर गया

अब भी कभी कभी

नज़र आ जाता है

देख कर मुस्कराता है

निरंतर कोई साथ है

अहसास दिलाता है

सुकून की तलाश को

मुकाम देता है

08-08-2011

1321-43-08-11

2 टिप्‍पणियां: