ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

गुरुवार, 25 अगस्त 2011

ख्याल हर मन में आते

ख्याल
हर मन में आते
निरंतर
नयी इच्छाएं जगाते
सपनों की
दुनिया में पहुंचाते
कुछ पूरे,
कुछ अधूरे रह जाते
मन के कोने में
दबे रह जाते
याद आते रहते
मन को विचलित
करते
हर बार नयी
आशाएं जगाते
उम्मीद में ज़िंदा
रखते
25-08-2011
1394-116-08-11

2 टिप्‍पणियां:

  1. manbhavan ,

    rhir se ummid jagi . bahut dino baad phir aapki kavita

    padne ke liye mili .

    aapki kavita v vichar ka sadaiv rahata hai intjar ,

    निरंतर हर मन में आते ख्याल

    उत्तर देंहटाएं
  2. sahi kaha aapne ki khyal to har man me aate hai.. sundar abhivaykti....

    उत्तर देंहटाएं