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मंगलवार, 16 अगस्त 2011

कैसा प्रजातंत्र है ?

कैसा प्रजातंत्र है ?

जहाँ नेता भ्रष्ट हैं

अपने में मस्त हैं

प्रजा त्रस्त हैं

चिंताओं से ग्रस्त हैं

भ्रष्टाचार से पस्त है

ना विरोध कर सकूँ

ना खुल कर रो सकूँ

निरंतर

ज़ुल्म सहता रहूँ

मर मर कर जीता रहूँ

खुद से पूछता हूँ

कब तक चुप रहूँ ?

गांधी के देश में

घुट घुट कर जीता रहूँ

आत्म सम्मान की

बली देता रहूँ

या उठ खडा हो जाऊँ

ज़ुल्म का बदला लूँ

व्यवस्था बदलने की

लड़ायी में अपनी

आहुती दूँ

16-08-2011

1365-87-08-11

1 टिप्पणी:

  1. Nice post .
    अन्ना तो पूरा अन्ना है और देसी है , कांग्रेसी है
    अगर कोई गन्ना भी खड़ा हो किसी बुराई के खि़लाफ़ तो हम हैं उसके साथ।

    कांग्रेसी नेता कह रहे हैं कि अन्ना ख़ुद भ्रष्ट हैं।
    हम कहते हैं कि यह मत देखो कौन कह रहा है ?
    बल्कि यह देखो कि बात सही कह रहा है या ग़लत ?
    क्या उसकी मांग ग़लत है ?
    अगर सही है तो उसे मानने में देर क्यों ?
    अन्ना चाहते हैं कि चपरासी से लेकर सबसे आला ओहदा तक सब लोकपाल के दायरे में आ जाएं और यही कन्सेप्ट इस्लाम का है।
    कुछ पदों को बाहर रखना इस्लाम की नीति से हटकर है।
    अन्ना की मांग इंसान की प्रकृति से मैच करती है क्योंकि यह मन से निकल रही है, केवल अन्ना के मन से ही नहीं बल्कि जन गण के मन से।
    इस्लाम इसी तरह हर तरफ़ से घेरता हुआ आ रहा है लेकिन लोग जानते नहीं हैं।
    आत्मा में जो धर्म सनातन काल से स्थित है उसी का नाम अरबी में इस्लाम अर्थात ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण है और भ्रष्टाचार का समूल विनाश इसी से होगा।
    आप सोमवार को
    ब्लॉगर्स मीट वीकली में भी हमने यही कहा था।

    उत्तर देंहटाएं