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गुरुवार, 4 अगस्त 2011

मेरा अंतर्मन बोला मुझ से, क्यों व्यथा बढाते हो ?


मेरा अंतर्मन बोला
मुझ से
क्यों व्यथा बढाते हो ?
अधिक पाने की इच्छा में
अपना चैन गँवाते हो
क्या नहीं दिया ?
परमात्मा ने तुमको
क्यों फिर रोते हो ?
जो मिला
उसमें संतुष्ट रहो
आवश्यकताएँ कम करो
इश्वर का नाम लो
निरंतर धैर्य रखो
कर्म करते चलो
जीवन सफल करो
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
04-08-2011
1301-23-08-11
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 

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