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रविवार, 7 अगस्त 2011

इज़हार-ऐ-मोहब्बत तुम भी कर दो

जो लिखता हूँ

तुम भी निरंतर

पढ़ते होगे

हमारी चाहत को

समझ गए होगे

देर किस बात की

मुंह से हाँ कह दो

नहीं तो

हमारी तरह लिख कर

बता दो

इज़हार-ऐ-मोहब्बत

तुम भी कर दो

हम भी समझ

जायेंगे

दिल की आग को

बुझा लेंगे

07-08-2011

1314-36-08-11

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