ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

बुधवार, 31 अगस्त 2011

मेरी आँखों से कोई उन्हें देख ले

कोई उन्हें 
मेरी आँखों से
देख ले
मेरी मोहब्बत को
पहचान ले
निरंतर दिल में
उठ रहे
जलजले को जान ले
मेरा पैगाम उन तक
पहुंचा दे
हाल-ऐ-दिल उन्हें
बता दे
मुझे मंजिल तक
पहुंचा दे 
31-08-2011
1424-146-08-11

1 टिप्पणी:

  1. Blogger शालिनी कौशिक said...

    मेरा पैगाम उन तक
    पहुंचा दे
    हाल-ऐ-दिल उन्हें
    बता दे
    मुझे मंजिल तक
    पहुंचा दे
    hal-e-dil kee khoobsurat abhivyakti.badhai
    सांसदों के चुनाव के लिए स्नातक होना अनिवर्य

    September 1, 2011 12:28 PM
    Delete
    Blogger डा. श्याम गुप्त said...

    ...न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशंते मुखे मृगा ....

    --पैगाम आप खुद ही जो दीजिए जाकर
    जो इश्क है तो खुद व खुद वो चले आयंगे |
    कासिद के हाथ भेज मत पैगाम मेरे दोस्त,
    कौन जाने वो कदम ना बहक जायेंगे ||

    September 1, 2011 2:13 PM
    Delete
    Blogger डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

    बहुत सुन्दर।
    गणशोत्सव की शुभकामनाएँ।

    September 1, 2011 7:28 PM
    Delete
    Blogger sushma 'आहुति' said...

    खुबसूरत रचना....

    September 1, 2011 8:56 PM

    उत्तर देंहटाएं