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शनिवार, 27 अगस्त 2011

अन्ना को ज़िंदा रखना है देश के लिए

चुल्लू  भर
पानी भी ज्यादा है
इनके डूबने के लिए
आत्मा इनकी मर चुकी
जुबां पर लगाम नहीं
इंसान के रूप में
शैतान हैं ये 
गिरगिट भी शर्माए
उनके रंग बदलने से
निरंतर सत्ता के लालच में
धर्म, ईमान सब भूल गए
भ्रष्टाचार में ऊपर से
नीचे तक डूबे हैं ये
नेता नहीं
देश के लिए कलंक हैं ये
जवाब इनको देना है
बहिष्कार इनका करना है
अन्ना को ज़िंदा रखना है
देश के लिए
27-08-2011
11402-124-08-11

3 टिप्‍पणियां:

  1. नई पुरानी हलचल से चल कर आये हैं.
    अन्ना जीत गए यह संदेसा लाये है.
    जीत की आपको badhऐ.
    बहुत बहुत बधाई आपके सुन्दर लेखन को.

    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है.

    उत्तर देंहटाएं