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रविवार, 14 अगस्त 2011

हँसमुखजी ने पाला बदला (हास्य कविता )

हँसमुखजी निरंतर

छोटी छोटी बात पर

आपा खो देते थे

बाद में पछताते थे

उनका एक पहलवान से

झगडा हो गया

उन्होंने क्रोध में पहलवान को

देख लूंगा की धमकी से

ललकार दिया

पहलवान का

स्वाभीमान जाग गया

ताकत दिखाने का

अवसर हाथ आ गया

पैंतीस किलो,पौने पाँच फुट के

हँसमुखजी के सामने

आओ देख लो

कह कर सीना तान कर

खडा हो गया

हँसमुखजी घबरा गए

फ़ौरन बोले

पहलवानजी बाज़ार में

सबके सामने

लड़ने से दोनों की

इज्ज़त खराब होगी

आप मेरे मोहल्ले में आओ

वहीं निपट लेंगे

दोनों मोहल्ले में पहुँच गए

हँसमुखजी पहलवान की

पिटायी से डर गए

कैसे बचा जाए

जुगाड़ लगाने लगे

लपक कर बोले

मोहल्ले के लोग क्या सोचेंगे

मेरे घर चलो

हिसाब किताब वहीं कर लेंगे

बिफराया हुआ पहलवान

उनके साथ घर पहुँच गया

फिर चिल्ला कर बोला

आजाओ अब देख लो

समय बर्बाद मत करो

मैं तुम्हारे हाथ पाँव तोडूँ

या तुम मेरे हाथ पाँव तोड़ोगे

फ़ौरन बता दो

हँसमुखजी ने फ़ौरन

पाला बदला

झट से बोले

घर आया मेहमान

भगवान् होता है

मेहमान का अपमान

भगवान् का अपमान होता है

भगवान् को

नाराज़ नहीं करना चाहिए

उसका स्वागत ,

सत्कार करना चाहिए

आप खाना खायेंगे या

चाय पानी से काम चलाएँगे

फ़ौरन बताइये

14-08-2011

1361-83-08-11

3 टिप्‍पणियां:

  1. स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं और ढेर सारी बधाईयां

    उत्तर देंहटाएं
  2. सुन्दर रचना,
    , स्वाधीनता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
    मेरे ब्लॉग पर भी पधारने का कष्ट करें .

    उत्तर देंहटाएं
  3. स्वतन्त्रता दिवस के पावन अवसर पर बधाई और हार्दिक शुभकामनाएँ।

    उत्तर देंहटाएं