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मंगलवार, 16 अगस्त 2011

हसरतें दिल में दबा कर रखता हूँ

कभी जी भर के 
चहकता था
खुल कर बहकता था
नदी सा बहता था 
निरंतर पंछी सा
उड़ता था
अब कायदे के
पिंजरे में बंद हूँ
ज़िम्मेदारियों के 
बोझ तले दबा हूँ 
हसरतें दिल में
दबा कर रखता हूँ
खामोश रहता हूँ
लाचारी से देखता हूँ
यादों के सहारे
जीता हूँ
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
शायरी,याद,यादें 
१६-०८-२०११
१३६७-८९-०८-११
E

1 टिप्पणी:

  1. हसरतें दिल में

    दबा कर रखता हूँ

    लाचारी से देखता हूँ

    यादों के सहारे

    जीता हूँ

    yaado ke sahare jindagi nahi ji jati ... yaaden yadi acchi ho to mahaka karti hai par yadi wo kadvi ho to dard deti hai . yaade to sirf yaaden hoti hai . un yaado se to bas ham kuch sikh sakte hai .
    aapka meri nayi post par hamesha swagat hai . dhanyavad . mai to bas jindagi ke har pehlu par likhna chahati hoon .

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